केन्र्द सरकार के साथ बातचीत में शामिल होंगे 32 किसान संगठनों के प्रतिनिधि

केंद्र ने किसानों को मंगलवार को वार्ता के लिए बुलाया, ठंड और कोरोना का दिया हवाला

सरकार के साथ बातचीत में शामिल होंगे 32 किसान संगठनों के ये प्रतिनिधि. विज्ञान भवन दिल्ली मे 3 बजे से बैठक

1.डॉ. दर्शनपाल- राज्य प्रमुख, क्रांतिकारी किसान यूनियन, पंजाब
2.कुलवंत सिंह संधू- जनरल सेक्रेटरी, जमूहरी किसान सभा, पंजाब
3.बूटा सिंह बूर्जगिल- अध्यक्ष भारतीय किसान सभा, दकोंदा
4.बलदेव सिंह निहालगढ़- जनरल सेक्रेटरी, कुल हिंद किसान सभा, पंजाब
5.निरभाई सिंह धुदिके- अध्यक्ष, क्रीती किसान यूनियन, पंजाब
6.रूलदू सिंह मानसा- अध्यक्ष, पंजाब किसान यूनियन, पंजाब
7.मेजर सिंह पुन्नावल- जनरल सेक्रेटरी, कुल हिंद किसान सभा, पंजाब
8.इंद्रजीत सिंह कोट बुद्धा- अध्यक्ष ,किसान संघर्ष कमेटी, पंजाब
9.हरजिंदर सिंह टांडा- अध्यक्ष , आजाद किसान संघर्ष कमेटी, पंजाब
10.गुरबक्श सिंह बरनाला- जय किसान आंदोलन पंजाब
11.सतनाम सिंह पन्नु, अध्यक्ष, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी
12.कनवलप्रीत सिंह, अध्यक्ष, किसान संघर्ष कमेटी पंजाब
13.जोगिंदर सिंह उग्राहा, अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहा
14.सूरजीत सिंह फूल, अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी
15.जगजीत सिंह दालेवाल- राज्य अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन सिधुपुर
16.हरमीत सिंह- राज्य अध्यक्ष, किसान यूनियन क्यूदियन
17.बलबीर सिंह राजवेल-राज्य प्रमुख, भारतीय किसान यूनियन राजवेल
18.सतनाम सिंह साहनी- जनरल सेक्रेटरी,भारतीय किसान आंदोलन, दाओबा
19.बोध सिंह मानसा, प्रमुख- भारतीय किसान यूनियन मानसा
20.बलविंदर सिंह आलेख- माझा किसान कमेटी
21.सतनाम सिंह बेहरू- अध्यक्ष, इंडियन फॉर्मर, एसोशिएशन ऑफ इंडिया
22.बूटा सिंह शादीपुर- प्रमुख, भारतीय किसान मंच
23.बलदेव सिंह सिरसा- लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी
24.जंगबीर सिंह टांडा-दाओब किसान समिति
25.मुकेश चंद्रा, दाओब किसान संघर्ष कमेटी
26.सुखपाल सिंह डाफ्फर- प्रेजिडेंट, गन्ना संघर्ष कमेटी

27.हरपाल सिंह सांघा- आजाद किसान कमेटी, दाओब

28.बलदेव सिंह मियापुर- भारतीय किसान यूनियन मान
29.कृपाल सिंह नाथुवाला- किसान बचाओ मोर्चा
30.परमिंदर सिंह पाल माजरा-भारतीय किसान यूनियन लखेवाल
31.प्रेम सिंह भंगू- कुल हिंद किसान फेडरेशन
32.किरणजीत सेखों- कुल हिंद किसान फेडरेशन

इससे पहले 13 नवंबर को हुई बैठक बेनतीजा रही थी. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसानों को तीन दिसंबर को दूसरे दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया था, ताकि तीन नए कृषि कानूनों से उपजी उनकी चिंताओं का निराकरण किया जा सके. लेकिन किसान आंदोलन के दबाव के कारण सरकार आज बात करने के लिए तैयार हुई है.

 

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