मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि 21 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश से मानसून की विदाई हो गई

बारिश ने किया भेदभाव — कहि घनघोर बरसे बदरा .. तो कही लम्बे इन्जार के बाद सिर्फ फुहारे ही हुई नसीब

लखनऊ. मौसम विभाग (Meteorological Department) ने उत्तर प्रदेश से मानसून (Monsoon) की विदाई का ऐलान कर दिया है. लखनऊ स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता (JP Gupta) ने बताया कि 21 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश से मानसून की विदाई हो गई. अब सवाल उठता है कि इस मानसूनी सीजन में यूपी में कितनी कम या ज्यादा बारिश हुई. साथ यह भी सवाल बनता है कि पश्चिमी और पूर्वी यूपी में बारिश की क्या स्थिति रही.

मौसम विभाग के आंकड़ों से यह जाहिर हो रहा है कि किन जिलों में ज्यादा बारिश हुई और किन जिलों में कम. हालांकि बारिश के सीजन में एक समय ऐसा था जब यूपी के 21 जिले बाढ़ से प्रभावित थे. तो आइए जानते हैं कि इस मानसूनी सीजन में कौन से जिले तर रहे रहे और कौन से जिले रहे सूखे…
उत्‍तर प्रदेश में औसत से कम हुई बारिश

यूपी के 20 से ज्यादा जिलों में महीनों बाढ़ के हालात जरूर रहे, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस मानसून सीजन में यूपी में औसत से कम बारिश हुई है. ये कमी 17 फीसदी है. मौसम विभाग यूपी को दो हिस्सों में बांटकर आंकड़े जारी करता है.

पूर्वी यूपी और पश्चिमी यूपी. इस साल मानसून सीजन में पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में 6 फीसदी, तो पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में 37 फीसदी कम बारिश हुई है. पूर्वी यूपी के ज्यादातर जिलों में बाढ़ के हालात थे, लेकिन इसके बावजूद कम बारिश की कुछ वजहे हैं. कारण ये है कि कुछ जिलों में तो औसत से बहुत ज्यादा बारिश हो गयी जबकि कुछ जिलों में औसत से बहुत कम बारिश हुई है.

मसलन बस्ती में 94 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है जबकि अम्बेडकरनगर में 55 फीसदी ज्यादा. दूसरी तरफ कौशाम्बी और कानपुर में 60 फीसदी कम बारिश हुई है. हालात ये रहे हैं कि पूर्वी यूपी के कुल 42 जिलों में से सिर्फ 13 जिलों में ही औसत से ज्यादा बारिश हुई है. बाकी के 29 जिलों में औसत से कम ही बारिश हुई है.

 

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