कमिश्नर या जिला प्रशासन को बेसिक शिक्षा बोर्ड के कार्य में हस्तक्षेप करने का क्षेत्राधिकार नहीं है -इलाहबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कमिश्नर या जिला प्रशासन को बेसिक शिक्षा बोर्ड (Basic Education Board) के काम में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है.

कोर्ट ने कहा है कि प्रशासन के हस्तक्षेप से मुक्त करने और चेक बैलेन्स कायम रखने के लिए बेसिक शिक्षा कानून एक पूर्ण कानून है. इसके तहत शिक्षा की गुणवत्ता व संचालन के लिए अलग प्राधिकारी नियुक्त किया गया है.

कमिश्नर या जिला प्रशासन को बेसिक शिक्षा बोर्ड के कार्य में हस्तक्षेप करने का क्षेत्राधिकार नहीं है. सरकार को सीमित अधिकार दिया गया है, इसलिए नियुक्ति में अनियमितता के मामले की कमिश्नर को जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है.

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दी कि कमिश्नर ने ह्विसिल ब्लोवर की तरह कार्य करते हुए जांच का आदेश दिया है. कोर्ट ने कमिश्नर आजमगढ़ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा की गयी नियुक्तियों की चार सदस्यीय कमेटी से जांच कराने के आदेश को अवैध और क्षेत्राधिकार से बाहर करार दिया है.

कोर्ट ने कमेटी की जांच रिपोर्ट 18 जनवरी 2020 व अधिकारियों और प्रबंध समितियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अध्यापकों का वेतन रोकने के बेसिक शिक्षा सचिव के आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने अध्यापकों को कारण बताओ नोटिस एवं बर्खास्तगी कार्रवाई को भी अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है और कहा है कि सचिव ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया.

यह आदेश जस्टिस पंकज भाटिया की एकलपीठ ने श्री दुर्गा पूर्व माध्यमिक बालिका जामिन और कई अन्य विद्यालयों की प्रबंध समितियों व अध्यापक, प्रधानाध्यापको की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है. याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आर के ओझा ने बहस की.

 

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